अहमद पटेल से भी ज्यादा राहुल गांधी के करीबी बन रहे हैं अशोक गहलौत

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नई दिल्ली: पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद अपनी पार्टी की आलोचना की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी का विकल्प नहीं हो सकती. सिब्बल के इस बयान के बाद पार्टी में सन्नाटा पसर गया. काफी देर तक कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. आखिरकार शाम को पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कपिल सिब्बल को जवाब दिया. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि सिब्बल को इस तरह से पार्टी के आंतरिक मुद्दे का जिक्र मीडिया में करने की कोई जरूरत नहीं थी और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत होती हैं.

लव जिहाद के कानून के खिलाफ प्रतिक्रिया
कुछ दिनों पहले खबर आई कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद के खिलाफ कानून लाने जा रही है. इस मुद्दे पर भी कांग्रेस की तरफ से सबसे पहले गहलोत ने ही अपनी प्रतिक्रिया दी. सीएम ने लव जिहाद बिल को लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि बीजेपी ने देश को बांटने और साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए लव जिहाद शब्द इजाद किया है. शादी व्यक्तिगत आजादी का मामला है. शादी को रोकने के लिए लाया जाने वाला कोई भी कानून पूर्णतया असंवैधानिक है. उन्होंने लिखा ‘ये किसी अदालत में नहीं टिकेगा. प्यार में जिहाद का कोई स्थान नहीं है. वे देश में ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां वयस्क लोगों की सहमति राज्य की दया पर निर्भर हो जाएगी.’

अशोक गहलोत से पहले कांग्रेस के किसी नेता ने लव जिहाद के मुद्दे पर कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं जुटाई. उन्हें लगा कि इससे पार्टी को हिंदुत्व के मुद्दे पर नुकसान उठान पड़ सकता है. लेकिन गहलोत ने बेबाकी से अपनी बात रखी. गेहलोत ने ट्वीट करते हुए आगे लिखा, ‘शादी निजी फैसला है और वे इसमें रुकावट डाल रहे हैं. यह व्यक्तिगत आजादी को छीनने जैसा है.
पार्टी के नए अहमद पटेल? अशोक गहलोत के हाल के रुख से सवाल उठने लगे हैं कि क्या वो पार्टी के नए अहमद पटेल बनते जा रहा हैं? क्या मुश्किल दौर में वो कांग्रेस के लिए बेबाकी से अपनी बात रखने वाले नेता हैं? पटेल पिछले दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे. वो अब भी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि वो पहले की तरह एक्टिव नहीं रहेंगे. मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो बेबाकी से पार्टी की बेबाकी से बात रख सके.
अशोक गहलोत की खासियत

अशोक गहलोत आखिर क्यों इस रोल के लिए फिट बैठते हैं इसके लिए कुछ चीजें समझनी जरूरी है. अहमद पटेल का काम करने का तरीका पुराना है. वो पार्टी लाइन से हटकर नेताओं से मिलते हैं. ब्यूरोक्रेट्स और कॉर्पोरेट के लोगों तक भी उनकी पहुंच है. मुश्किल घड़ी में पार्टी के लोग ‘अहमद भाई’ को ही पुकारते हैं. खास बात ये है कि वो वक्त पर चीज़ों को सुलझाते हैं.

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