आयुष ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी जारी करेगा पतंजलि को नोटिस

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पतंजलि की ओर से कोरोना की दवा बताकर लांच की गई कोरोनिल और श्वासारि दवा विवादों में घिर गई है। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने और उत्तराखंड सरकार से इस संबध में जवाब-तलब करने के बाद प्रदेश सरकार ने पल्ला झाड़ लिया है। प्रदेश के आयुष विभाग का कहना है कि पतंजलि को इम्युनिटी बूस्टर बनाने का लाइसेंस दिया गया था। कोरोना की दवा कैसे बना ली और दवा की किट का विज्ञापन क्यों किया गया इसका पता लगाया जाएगा। इस पर आयुष ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी की ओर से पतंजलि को नोटिस जारी किया जाएगा।

पतंजलि इस दवा कोई विज्ञापन नहीं कर सकती है। वहीं, केंद्रीय आयुष मंत्रालय की ओर से दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगाने के संबंध में आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि हमारी दवा और दावा दोनों पूरी तरह सही हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इनसे जुड़ी कुछ जानकारियां मांगी थीं, जो उपलब्ध करा दी गई हैं।

मंगलवार सुबह पतंजलि के जयपुर की निम्स यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाई गई दवा को कोरोना के इलाज के दावे के साथ लांच किया। दावा है कि कोरोना के मामलों में यह तीन दिन में करीब 69 प्रतिशत और सात दिनों में शत प्रतिशत सकारात्मक परिणाम देती है। इस दौरान स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण समेत निम्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो.बलबीर सिंह तोमर मौजूद रहे।

आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया कि दवाओं की क्लिनिकल केस स्टडी दिल्ली, अहमदाबाद और मेरठ से लेकर देश के विभिन्न शहरों में दो स्तरों पर सरकारी और निजी तौर पर की गई है। क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआई) से अप्रूवल लेकर सरकार के सभी मानकों का पालन कर दवा का सफल ट्रायल किया गया है। निम्स यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ.बलवीर एस तोमर ने कहा कि इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी की संस्तुति से लेकर रजिस्ट्रेशन और क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल की सभी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। बताया कि कोरोना के 100 मरीजों पर इसका सफल परीक्षण किया गया।

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