उत्तराखंड को दी गईं चैंपियन की गालियां भूल गई बीजेपी?

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कौमी गुलदस्ता संवाददाता (देहरादून):  इस शीतकालीन सत्र में बीजेपी ने चैंपियन को सत्ता पक्ष से अलग कर दिया. पिछले कुछ दिनों से चर्चाएं तेज़ थीं कि चैंपियन बीजेपी में घर वापसी की कोशिशें कर रहे हैं. इन चर्चाओं को आधार इसलिए भी मिला क्योंकि एक हफ़्ते के अंदर ही चैंपियन उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत के साथ दो बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलने पहुंचे. शुक्रवार को चैंपियन सचिवालय में मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री के साथ सचिवालय से निकलते दिखे थे और मंगलवार रात मुख्यमंत्री आवास में बीजेपी विधायकों के साथ बैठे दिखे थे. तो क्या ये चैंपियन की वापसी के संकेत हैं? प्रदेश बीजेपी में अभी कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

बदले-बदले से हैं मिज़ाज

तमंचे लहराने और उत्तराखंड को गालियां देने का वीडियो वायरल होने के बाद 10 जुलाई को बीजेपी से खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को 6 साल से लिए निष्कासित कर दिया था. उसके बाद से वह गायब से हैं. निष्कासन के तुरंत बाद हुए मॉनसून सत्र में वह शामिल नहीं हुए थे हालांकि इसकी वजह उनकी टांग टूटना बताई गई थी. अब शीतकालीन सत्र में शामिल होने से पहले उन्होंने पार्टी में वापसी की असफल कोशिश की और इसी कोशिश में वह नज़र आए हैं.

इस बार ख़ास बात चैंपियन का बदला हुआ मिज़ाज है. तमंचे लहराकर उत्तराखंड को गाली देने वाला कुख्यात वीडियो वायरल होने से पहले वह दिल्ली में रिपोर्टर को जान से मारने की धमकी की वजह से सुर्खियों में आए थे. लेकिन अब वह बेहद विनम्रता से बात करने से इनकार कर रहे हैं.

छोटे भाई को चाहिए केस वापिस

लोक सभा चुनाव के दौरान कुंवर प्रणव चैंपियन हरिद्वार के झबरेड़ा से बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल से भिड़े हुए थे. जब बाकी पार्टी चुनाव प्रचार में व्यस्त थी तब ये दोनों विधायक एक दूसरे को देख लेने, मार देने की धमकियां दे रहे थे. पार्टी की सख़्ती के बाद दोनों ने हाथ मिया लिया और चैंपियन ने कर्णवाल को अपना छोटा भाई घोषित कर दिया लेकिन इससे तल्खियां ख़त्म नहीं हुईं.

दोनों ने एक-दूसरे पर केस किए हुए हैं और दोनों के बीच मुक़दमेबाज़ी अब भी जारी हैं. चैंपियन की वापसी की अफ़वाहों के बीच कर्णवाल ने कहा कि चैंपियन की वापसी तभी होनी चाहिए जब वह उन पर दायर मुक़दमे वापस ले लें. यानी कम से कम देशराज कर्णवाल को तो चैंपियन के उत्तराखंड को गाली देने से कोई मतलब नहीं है.

वापसी की संभावना

बीजेपी विधायक चैंपियन की वापसी की वकालत करने भी लगे हैं. हरिद्वार के रानीपुर से पार्टी के विधायक आदेश चौहान कहते हैं कि गलती तो किसी से भी हो जाती है. अब चैंपियन के स्वभाव में काफ़ी बदलाव आया है. वह आशा जताते हैं कि पार्टी चैंपियन को माफ़ कर देगी. चैंपियन की वापसी की वकालत करने वाले तो बीजेपी में दिखने लगे हैं लेकिन उनकी वापसी का विरोध करने वाले नहीं. न्यूज़ 18 ने पार्टी प्रवक्ता वीरेंद्र बिष्ट से चैंपियन की पार्टी में वापसी के बारे में पूछा तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि यह फ़ैसला प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को करना है.

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चैंपियन की बीजेपी में वापसी को लेकर पार्टी में खदबदाहट चल रही है. देशराज कर्णवाल और दूसरे पार्टी नेताओं के बयान से इसके संकेत भी मिल रहे हैं. तो सवाल यह है कि बीजेपी उत्तराखंड को दी गई चैंपियन की गालियां भूल जाएगी? और ऐसा हुआ तो क्या उत्तराखंड निवासी भी यह भूल जाएंगे?

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