उत्तर प्रदेश में लागू होगा पुलिस कमिश्नर सिस्टम, CM योगी ने जताई सहमति

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लखनऊ (कौमी गुलदस्ता ब्यूरो रिपोर्ट):  उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने का रास्ता साफ हो गया है. जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर अपनी सहमति जता दी है. अगले हफ्ते मंगलवार को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में इसे लेकर प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है. प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगते ही लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर की तैनाती होगी. शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री आवास में सीएम योगी ने प्रदेश के आला अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें कमिश्नर सिस्टम लागू करने पर अंतिम मुहर लगाई गई. कहा जा रहा है कि मंगलवार (14 जनवरी) को कैबेनेट की होने वाली मीटिंग में इस संबंध में प्रस्ताव पास किया जाएगा.

डीजीपी ओपी सिंह ने भी किया इशारा

बता दें कि इससे पहले लखनऊ में यूपी 112 के तीसरे स्थापना दिवस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीपी ओपी सिंह ने कहा था कि लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाने पर शासन में चर्चा हो रही है. जल्द ही शासन इस संबंध में कोई फैसला लेगा.

दरअसल गुरुवार को प्रदेश में 14 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए थे और नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया था. राजधानी लखनऊ और नोएडा के एसएसपी की नई तैनाती नहीं होने के चलते इन जिलों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम शुरू होने की चर्चा हो रही थी. जिस पर डीजीपी ओपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी प्रतिक्रिया दे दी. ऐसे में इस सिस्टम में क्या बदलाव आता है? उस पर चर्चाओं का बाजार गर्म है. जानकारों के मुताबिक पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने से पुलिस के पास मजिस्ट्रेट के अधिकार आ जाते हैं.

क्या कुछ बदलेगा अगर लागू हो जाएगा ये सिस्टम
पुलिस कमिश्नरी में कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में कमांड एक ही अफसर के पास होती है. ऐसा न होने से दंगे जैसे हालातों में कोई एक्शन जैसे लाठीचार्ज या फायरिंग के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी पड़ती है. किसी अपराधी को जिला बदर करना हो, गैंगस्टर लगाना हो, जुलूस, धरना-प्रदर्शन की इजाजत देना हो. पार्किंग यहां तक कि बार, असलहे के लाइसेंस से जुड़े मामलों में भी इजाजत देने और मामले के निपटारे के अधिकार भी जो मजिस्ट्रेट के पास होते हैं. वहीं कानून-व्यवस्था की पाबंदी से जुड़ी धाराओं जैसे धारा-144 और शांति भंग जैसी धाराओं को लगाने का अधिकार भी जो मजिस्ट्रेट के पास होता है, वो पुलिस के पास आ जाएगा.

आम तौर पर ऐसे मामलों से जुड़े विवादों को निपटाने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ती है. यदि पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो जाता है तो ऐसे कई अधिकार पुलिस के पास आ जायेंगे. बता दें कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू है. बीते दिनों नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ लखनऊ में जो हिंसक प्रदर्शन हुआ था उसके बाद से लखनऊ में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम की वकालत शुरू हो गई थी. उस समय सरकार के ही कुछ माननीयों का कहना था कि अगर राजधानी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम होता तो 19 दिसंबर को लखनऊ में हुआ हिंसक प्रदर्शन बेहतर तरीके से मैनेज हो सकता था.

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