कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का अल्मोड़ा में पूरी तरह पालन

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अल्मोड़ा: आज रामनवमी का महापर्व है और ऐसा पहली बार हुआ है कि मंदिर पूरी तरह से सुनसान पड़े हैं. कोई भी श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के लिए नहीं आ रहा. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का अल्मोड़ा में तो कम से कम पूरी तरह पालन किया जा रहा है. 16वीं शताब्दी में मल्ला महल में स्थापित राम शिला मंदिर में भी पहली बार ही ऐसा सन्नाटा दिख रहा है.

1588 में स्थापित मंदिर

अल्मोड़ा के मल्ला महल में राजा रुद्रचन्द ने 1588 में राम शिला मंदिर की स्थापना की थी. राजा ने राजमहल के पास ही भगवान राम के चरणों को स्थापित किया ताकि वह भगवान राम के चरणों की पूजा अर्चना कर सकें. इसके साथ ही वही पर नन्दा देवी की स्थापना भी की गई थी, जिन्हें बाद में दूसरे स्थान पर स्थापित किया गया.

यह पहला मौका है जब रामनवमी के दिन भगवान राम के राम शिला मंदिर में भगवान राम के चरणों की पूजा करने के लिए लोग नहीं पहुंचे. पुजारियों ने ही मंदिर खोलकर भगवान राम के चरण पादुका की पूजा अर्चना की और फिर अपने घरों को निकल गए.

लॉकडाउन का पालन

मल्ला महल में हर साल सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचकर भगवान राम के चरण पादुका की पूजा अर्चना कर अपने नौ दिनों के व्रत का समापन करते थे लेकिन इस बार सब कुछ बदल गया. कोरोना संक्रमण की मार ऐसी पड़ी कि कोई भी श्रद्धालु मंदिर में नहीं पहुचा. लोगों ने अपने घरों में ही भगवान राम की पूजा अर्चना की और लॉकडाउन का पालन किया.

पंडित धर्मानन्द पंत का कहना हैं कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा देखा कि राम नवमी के दिन कोई भी श्रद्धालु मंदिर में पूजा अर्चना के लिए नहीं आया. वह कहते हैं कि अब तो प्रार्थना यही है कि इस तपस्या का सही प्रभाव हो और कोरोना संक्रमण खत्म हो ताकि लोग फिर भगवान के दरबार में माथा टेकने आ सकें.

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