चाचा शरद जैसा कारनामा करने की फिराक में थे अजित पवार, उलटे पड़ गए पासे

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नई दिल्‍ली:(कौमी गुलदस्ता संवाददाता):  महाराष्‍ट्र में बार-बार करवट बदलने के बाद अब सियासी ऊंट एक ठौर बैठता दिख रहा है. उम्‍मीद है कि कल यानी बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले पहले ठाकरे बन जाएंगे. पिछले कुछ दिन महाराष्‍ट्र की सियासत में बड़ी उठापटक और उलटफेर वाले रहे.

पहले तो कांग्रेस ने विचारधारा के स्‍तर पर विरोधी शिवसेना को समर्थन देने पर सहमति जताई और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार रात उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने की घोषणा कर दी. अगली सुबह चौंकाने वाली थी. शनिवार अलसुबह बीजेपी ने वैचारिक प्रतिद्वंद्वी एनसीपी के अजित पवार के समर्थन से बड़ा उलटफेर कर दिया. राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम और एनसीपी के अजित पवार को डिप्‍टी सीएम की शपथ दिला दी.

चाचा-भतीजे की सियासी चाल एक जैसी, नतीजे एकदूसरे के उलट
महाराष्‍ट्र में हुए पूरे घटनाक्रम में अजित पवार चाचा शरद पवार के नक्‍शेकदम पर चलते नजर आए. हालांकि, दोनों की सियासी चाल में बड़ा फर्क यह था कि शरद पवार 1978 में वसंत दादा पाटील की सरकार गिराकर खुद मुख्‍यमंत्री बनने में सफल रहे थे. वहीं, अजित पवार को चार दिन बाद ही डिप्‍टी सीएम के पद से इस्‍तीफा देना पड़ा.

हालात ऐसे रहे कि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी बहुमत परीक्षण (Floor Test) से पहले ही हथियार डाल दिए और इस्‍तीफा राज्‍यपाल को सौंप दिया. दरअसल, आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) रायबरेली से हार गईं और जनता पार्टी की सरकार बनी. इस दौर में महाराष्‍ट्र में भी कांग्रेस को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. राज्‍य के तत्कालीन मुख्‍यमंत्री शंकर राव चह्वाण ने हार की नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए पद से इस्‍तीफा दे दिया था. उनके बाद वसंतदादा पाटील महाराष्‍ट्र के सीएम बने.

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