देहरादून में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ बेमियादी धरने पर बैठी महिलाएं

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कौमी गुलदस्ता ब्यूरो रिपोर्टः देहरादून के परेड ग्राउन्ड में मुस्लिम सेवा संगठन के बैनर तले नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में सैकड़ों लोग बेमियादी धरने पर कल से बैठे हैं जिसमें बड़ी तादाम में महिलाओं ने भाग लिया है। धरने का समर्थन शहर काज़ी मौलाना मौहम्मद अहमद कासमी ने भी किया है। सोमवार सुबह 10 बजे से ही परेड ग्राउन्ड में मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हुए और बेमियादी धरना शुरू करने का ऐलान किया। महिलाओं की मांग है कि केन्द्र सरकार ने जिस भेदभावपूर्ण तरीके से नागरिकता संशोधन कानून बनाया है वह संविधान के खिलाफ है। हमारे संविधान में धर्म के आधार पर कोई भी कानून बनाने का प्राविधान नहीं हैं, तो फिर भाजपा ऐसा कानून क्यों ला रही है जिसमें भेदभाव साफ दिखाई दे रहा है। उन्होेंने कहा कि मुस्लिम समाज को नागरिकता संशोधन कानून में शामिल न करना ही भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है। धरने पर बैठी श्रीमती रईस फातमा ने कहा कि हम अपने संविधान को बचाने के लिए घर से बाहर निकले हैं और जब तक केन्द्र सरकार इस कानून को वापिस नहीं लेती तब तक हम इसी तरह बेमियादी धरने पर बैठे रहेंगे। हमें अपनी अवाज उठाने का पूरा अधिकार है।
एडवोकेट रज़िया बेग ने कहा कि आज जब देश आर्थिक रूप से पिछड़ रहा है, बेरोजगार सड़कों पर आंदोलित हैं, व्यापारी परेशानी से जूझ रहे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं ऐसे नाजुक दौर में केन्द्र सरकार को इस ओर कारगर कदम उठाने चाहिए थे परन्तु वह इस तरह के नागरिक संशोधन कानून लाकर देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हंै। उन्होंने कहा कि जनता जीडीपी, बेरोजगारी के बारे में सरकार से सवाल न पूछे इसलिए केन्द्र सरकार इस तरह के कानून बनाकर लोगों को आपस में लड़वाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का सीएए के बारे में खुलकर चर्चा न करना ही इस बात को दर्शाता है कि उनकी मंशा क्या है। जहां एक ओर हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि एनआरसी के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई वहीं दूसरी ओर गृह मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि पहले सीएए आयेगा फिर एनआरसी लायी जायेगी। अब इस तरह की बातों से मुस्लिम समुदाय में भय पैदा होना लाज़िमी है। उन्होंने कहा कि हम बस इतना चाहते हैं कि सीएए में जहां आपने हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन आदि समुदाय के लोगों को शामिल किया है वहीं मुस्लिम समुदाय को भी शामिल किया जाये।
मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरेशी ने कहा कि दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 37 दिनों से लाखों महिलाएं बेमियादी धरने पर बैठी हैं मगर हमार गृह मंत्री अमित शाह के कान में जूं तक नहीं रेंग रही, और अपनी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि दिल्ली चुनाव में जनता कमल का बटन इतनी तेज दबायें जिसका झटका शाहीन बाग में बैठे लोगों को लगे। ऐसी छोटी सोच वाले हमारे गृह मंत्री यह नहीं जानते कि शाहीन बाग मंे बैठी महिलाएं संविधान को बचाने के लिए धरना दे रहीं हंै और आप संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। हमारे इस प्यारे से मुल्क में जहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई आपस में भाईचारे के साथ रह रहे हैं आप उनके बीच खाई पैदा करने का काम करे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं हर उस इंसान के खिलाफ हूं जो संविधान के खिलाफ काम करता है।
संगठन के महासचिव आसिफ हुसैन ने कहा कि यह तो अभी आगाज हैं, आगे-आगे देखिए होता है क्या। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में आपातकाल की स्थिति बनी हुई है, जहां कोई अपनी बात नहीं कह सकता। केन्द्र सरकार हिटलरशाही की तरह कार्य कर रही है। जबकि हमारा हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर समुदाय के लोगों को बराबरी का अधिकार हमारे खूबसूरत संविधान ने दिया है लेकिन आज जिस तरह से संविधान के खिलाफ कानून बनाये जा रहे हैं हम उसकी निंदा करते हैं और पीएम मोदी जी से अपील करते हैं कि इस तरह के बांटने वाले कानून का वापस लिया जाये तभी आपका नारा ‘सबका साथ, सबका विकास एवं सबका विश्वास’ का सपना पूरा हो सकता है।

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