देहरादून में बंद का असर, धरने पर सबकी नजर

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कौमी गुलदस्ता ब्यूरोः आज भारत बंद का असर देहरादून में साफ देखने को मिला। जहां एक ओर लोगों ने अपनी दुकाने बंद रखी वहीं दूसरी ओर परेड ग्राउन्ड में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आवाज उठाने वालों की तादाम में काफी इजाफा देखा गया। भारी संख्या में महिलाओं ने हिस्सेदारी ली और लोगों का हुजूम इतना बढ़ता चला गया कि जगह की कमी साफ दिखाई दी। महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर सीएए के खिलाफ धरने पर बैठी हैं उनका कहना है कि हम अपने हिन्दुस्तान और संविधान को बचाना बैठे हैं, और हमें पूरी उम्मीद है कि मोदी सरकार हमारी आवाज़ को जरूर सुनेंगे।

मुस्लिम सेवा संगठन द्वारा चलाये गये अनिश्चितकालीन धरने को काफी समर्थन मिल रहा है। आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आज़ाद अली ने अपना समर्थन देते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि केन्द्र सरकार इस काले कानून को वापस ले। देश को इस समय गिरती जीडीपी से लड़ने की जरूरत है, बेरोजगारी पर काम करने की जरूरत, भारत को विश्व के चरमोत्कर्ष पर ले जाने की जरूरत है न की इस तरह के कानून बनाकर लोगों को लाइन में लगाकर अपनी नागरिकता साबित करने की। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कानून की निंदा करते हैं, और हम गृह मंत्री अमित शाह से मांग करते हैं कि सीएए को वापस लें।

धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि मोदी सरकार का कहना है कि यह कानून किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं बनाया गया है बल्कि देने के लिए बनाया गया और उन्होंने कहा कि एनआरसी के बारे में अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। तो हम यह कहना चाहता है कि जब प्रधानमंत्री कह रहे है कि एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई तो गृह मंत्री अमित शाह क्यों बार-बार कह रहे हैं कि पहले सीएए आयेगा उसके बाद एनआरसी पूरे देश में लागू की जायेगी, इससे मुस्लिम समुदाय में भय का माहौल पैदा हो रहा है। हम मांग करते हैं कि सीएए में जहां सरकार अन्य धर्मों को शामिल कर रही है वहां पर मुस्लिम समुदाय को भी शामिल किया जाये।

धरना स्थल पर शहर के नामी जिम्मेदार लोगांे ने शिरकत की। जिसमें शहर काज़ी मौलाना मौहम्मद अहमद कासमी, भगत सिंह कालोनी के पार्षद इलियास अंसारी, श्रीमती रईस फातमा, मुस्लिम कालोनी के पार्षद इतात खान, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गुलफाम अली, लताफत हुसैन, रजिया बेग, नईम कुरैशी, आसिफ हुसैन, सद्दाम कुरैशी आदि लोग मौजूद थे।

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