धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल-डीजल के मुद्दे पर सोनिया गांधी पर किया पलटवार

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नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के वार पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार किया है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल का पैसा ‘दामाद’ गरीबों के खाते में जमा नहीं करती है. मोदी सरकार लोगों से मिले टैक्स को ‘दामाद’ नहीं गरीबों के कल्याण में खर्च करती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस दामाद और राजीव गांधी फाउंडेशन के खाते में डीबीटी करती थी, जबकि मोदी सरकार गरीबों के खाते डालती है.’

कोरोना संकट में भी मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस राजनीति का कोई भी मुद्दा नहीं छोड़ रही है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पेट्रोल और डीजल की दरों को लेकर आज सरकार को नसीहत देने का प्रयास किया, सोनिया गांधी ने एक वीडियो मैसेज पोस्ट कर लोगों से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बोलने की अपील की है. ये बात और है की कांग्रेस की इस बयानबाजी पर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उसके खिलाफ़ गुस्सा जाहिर किया.

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को सोनिया गांधी पर पलटवार करते हुए उन्हें बताया कि कोरोना संकट के दौरान पेट्रोल और डीजल से मिले टैक्स का पैसा स्वास्थ, रोजगार और लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान किए जाने में खर्च हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह भाजपा की सरकार है, जो लोगों की मेहनत की कमाई को नगद लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए गरीबों के कल्याण में खर्च करती है, न कि कांग्रेस की तरह दामाद और राजीव गांधी फाउंडेशन के बैंक खातों में जमा कराया जाता है.

पेट्रोल-डीजल की कीमत 70% हो गई थी कम
प्रधान ने कहा कि विश्व और भारत का अर्थ तंत्र इस समय चुनौती के दौर से गुजर रही है. कोरोना वैश्विक महामारी के कारण दुनिया में तेल और गैस इडस्ट्री भी मांग और आपूर्ति के विचित्र संकट से गुजर रहा है. लॉकडाउन की वजह से अप्रैल और मई में पेट्रोल और डीज़ल के डिमांड लगभग 70 फीसदी कम हो गई थी, जून में आर्थिक हलचल बढ़ने के साथ धीरे-धीरे मांग वापस आ रही है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल की दरों में हुई हालिया वृद्धि का बहुत असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा है, उन्होंने यह भी कहा कि जब घर परिवार में संकट आता है, तो व्यक्ति बड़े धैर्य से आर्थिक संसाधनों का प्रबंधन करता है. भविष्य की चुनौतियों से निपटने की भी तैयारी की जाती है, तेल की कीमतों में वृद्धि को इसी नजरिए से देखना चाहिए.

बीजेपी का सोनिया गांधी पर पलटवार
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सोनिया गांधी कह रही हैं की केंद्र सरकार तिजोरी भर रही है. लेकिन वह भूल गईं की कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, झारखण्ड और पडुचेरी ने भी पिछले तीन महीने में प्रजा के उपर बोझ डालते हुए तेल पर भारी भरकम वैट लगाया है. ऐसे में सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस शासित राज्यों से जमीनी हकीकत पता करना चाहिए. उन्हें यह पता होना चाहिए कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल से जो राजस्व जुटाया है, वह कोविड-19 से पैदा हुई वर्तमान और भावी चुनौतियों के समाधान में खर्च किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के जरिए 1 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपये की योजना बनाई गई. गरीबों और किसानों के खाते में पैसा जमा कराया जा रहा. छह माह तक उन्हें राशन मुफ्त में दिया जा रहा है. जबकि तीन महिने तक गरीब परिवारों को फ्री में एलपीजी सिलेंडर दिए गए. क्या सोनिया गांधी और कांग्रेस को गरीब परिवारों के कल्याण में पैसा खर्च करना हज़म नहीं हो रहा है. ईपीएफ में पैसा देना क्या तिजोरी भरना है. मोदी जी की योजना में भरने में नहीं बल्कि बांटने पर आधारित है.

 

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