मोदी सरकार ने क्यों लगाया ई-सिगरेट पर बैन

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ब्यूरो रिपोर्टः बुधवार को कैबिनेट की बैठक में लिए गए फ़ैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्र निर्मला सितारमण ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सरकार ने ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. साथ ही रेलवे कर्मचारियों को बोनस दिए जाने की घोषणा की गई.

वित्त मंत्री ने कहा, “अब ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, परिवहन, आयात, निर्यात, जमा करने और यहां तक कि वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है.”

इसके लिए एक अध्यादेश लाया गया है. प्रस्तावित अध्यादेश में उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम एक साल की सज़ा और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

उन्होंने कहा कि युवाओं की सेहत पर ई-सिगरेट का जो असर हो रहा है उसे ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध का फ़ैसला लिया है. उन्होंने अमरीका में हुए एक अध्ययन का हवाला दिया है और आंकड़ों के अनुसार, वहां 10वीं और 12वीं के स्कूली बच्चों में ई-सिगरेट का चलन 77.8 प्रतिशत बढ़ा है जबकि मिडिल स्कूल के बच्चों में ई-सिगरेट लेने का चलन 48.5 प्रतिशत बढ़ा है. उन्होंने कहा कि ‘अमरीका में इससे सीधे तौर पर जुड़ी सात मौतें हुई हैं. हालांकि वैज्ञानिक अध्ययन में अभी साबित होना बाक़ी है कि लंबे समय तक ई-सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाला नुक़सान कितना है.’

निर्मला सीतारमण का कहना है कि देश में ई-सिगरेट के कई ब्रांड मौजूद हैं लेकिन वे सभी विदेश में बनते हैं और आयात किए जाते हैं. ई-सिगरेट से निकलने वाले धुएं में बहुत अधिक निकोटिन पाया जाता है.

बीते फरवरी में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने सभी राज्यों को ईएनडीएस (इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स) पर प्रतिबंध लगाने के लिए लिखा था.

हालांकि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्थगनादेश लगा दिया था.

धूम्रपान नहीं करने वालों में निकोटिन की लत बढ़ने को ध्यान में रखते हुए देश के शीर्ष मेडिकल रिसर्च निकाय इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसरर्च ने ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है.

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