रेडियो सबसे सुलभ मीडिया है: अनिल दत्त शर्मा

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देहरादून: विश्व रेडियो दिवस पर उत्तरांचल विश्विद्यालय में गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए भारतीय सूचना विभाग के फील्ड पब्लिसिटी ऑफिसर अनिल दत्त ने कहा कि विश्व रेडियो दिवस, रेडियो के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रसारकों के बीच नेटवर्किंग को मजबूत बनाने का एक माध्यम है. भले ही रेडियो एक शताब्दी पुराना हो लेकिन सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। हम यह कैसे भूल सकते हैं कि इसने आपदा राहत और आपातकालीन प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि रेडियो सबसे सुलभ मिडिया है. इसे दुनिया के किसी भी जगह से सुना जा सकता है. जो लोग सही से पढ़ना लिखना नहीं जानते हैं, रेडियो के जरिये जानकारी प्राप्त करलेते हैं.
उन्होंने आग कहा कि विश्व रेडियो दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य जनता और मीडिया के बीच रेडियो के महत्व को बढ़ाने के लिए जागरूकता फैलाना है. यह निर्णयकर्ताओं को रेडियो के माध्यम से सूचनाओं की स्थापना और जानकारी प्रदान करने, नेटवर्किंग बढ़ाने और प्रसारकों के बीच एक प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रदान करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।

छात्रों को संबोधित करते हुए मॉस कॉम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेंसडेन ने 24 दिसम्बर,1906 को रेडियो प्रसारण की शुरुआत की थी. 1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयॉर्क के हाईब्रिज क्षेत्र में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरू किया था. लेकिन पुलिस ने इसे अवैध करार दे कर इसको बंद करवा दिया था. भारत की बात की जाये तो वर्ष 1936 में भारत में सरकारी ‘इम्पीरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई थी. जो आज़ादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी बन गया. आज रेडियो ने अपनी पहुंच बढ़ाई है. उन्होंने आगे कहा कि जहां एक तरफ सरकारी रेडियो स्टेशनों के ज़रिये लोगों तक ज्ञान का भंडार पहुंचाया जाता है. तो वहीं प्राइवेट रेडियो स्टेशन भी भारत में मनोरंजन को एक अलग स्तर तक ले जा रहे हैं. रेडियो के विस्तार में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चन्द्र बसु का योगदान भी अहम रहा है. वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया था.

कार्यक्रम का संचालन सुश्री स्मृति उनियाल ने किया. इस अवसर पर शिक्षक वेद प्रकाश एवं पवन डबराल में भी छात्रों को रेडियो की अहमियत के बारे में जानकारी दी।

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