शुभकामनाएं… उत्तराखंड की दो फ़िल्में एशिया के सबसे बड़े ग्रीन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में

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देहरादून: (कौमी गुलदस्ता संवाददाता): उत्तराखंड की दो फ़िल्में एशिया के सबसे बड़े ग्रीन फ़िल्म फ़ेस्टिवल कहे जाने वाले सीएमएस वातावरण इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में शामिल की गई हैं. इनमें से पहली फ़िल्म तो निर्मल चंद्र डंडरियाल की मोती बाग है जो ऑस्कर में डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ के लिए भेजी जा रही दो फ़िल्मों में से एक है. दूसरी है हिमालय में परंपरागत रूप से बनने वाले भूकंपरोधी मकानों पर बनी श्रीनिवास ओली की शॉर्ट फ़िल्म कोटीबनाल. इन दोनों फ़िल्मों को फ़ेस्टिवल के सेलेब्रेटिंग हिमालयाज़ कैटेगरी में शामिल किया गया है.

कोटीबनाल

कोटीबनाल हिमालयी क्षेत्र में बने भूकंपरोधी मकानों पर बनाई गई फ़िल्म है. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों ख़ासकर उत्तरकाशी में ये मकान या मंदिर परंपरागत रूप से तैयार किए जाते थे. इनमें स्थानीय पत्थरों और लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता था. इनमें से कई भवन तो चार-पांच सौ साल तक पुराने हैं. उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और संवेदनशीलता के लिहाज से सिस्मिक ज़ोन 4 और 5 में आता है. उत्तरकाशी में 1991 में रिक्टर स्केल पर 6.6 तीव्रता का भूकंप आ चुका है जिसने काफ़ी तबाही भी मचाई थी लेकिन कोटीबनाल शैली से बने मकान खड़े रहे थे. कोटीबनाल शैली के यही मकान श्रीनिवास ओली की सवा बारह मिनट की फ़िल्म का विषय हैं.

पत्रकार, शिक्षक और शौकिया फ़िल्मकार

बता दें कि श्रीनिवास ओली पत्रकारिता, शिक्षण करते हुए फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में पहुंचे हैं. IIMC दिल्ली से पूर्व छात्र श्रीनिवास ओली अख़बार और टीवी में 10 साल से ज़्यादा काम करने के बाद शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हुए. अभी वह चंपावत ज़िले में प्राथमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के तौर कार्यरत हैं.

विज्ञान के शिक्षक और शौकिया फ़िल्मकार श्रीनिवास ओली की दो शॉर्ट फ़िल्मों को पहले भी राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिल चुके हैं. हिमालयी क्षेत्र में बने घराटों की स्थिति और उनके तकनीकी पुनुरुद्धार के प्रयासों पर आधारित “घराट– रिवाइवल ऑफ वाटरमिल्स” को 5वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म समारोह, लखनऊ (2015) में Special Award for Technical Excellence – Sound recording and design मिला था. इसके बाद उत्तराखंड में जल संरक्षण और प्रबंधन के परंपरागत तरीके पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “नौला – वाटर टेंपल ऑफ हिमालयाज़” को 7वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म समारोह, कोलकाता (2017) में Bronze Beaver Award से नवाज़ा गया था.

मोतीबाग

59 मिनट की फ़िल्म मोती बाग भारत से ऑस्कर में डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ के लिए जाने वाली दो फ़िल्मों में से एक है. यह डॉक्यूमेंट्री पौड़ी गढ़वाल के कल्जीखाल ब्लॉक में पलायन करवाने वाली परिस्थितियों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले 83 साल के विद्यादत्त शर्मा पर बनी है. इस फ़िल्म के निर्देशक हैं दिल्ली में रहने वाले पौड़ी के ही निर्मल चंद्र डंडरियाल. वह उत्तराखंड के अकेले ऐसे निर्देशक हैं जिन्हें तीन नेशनल अवॉर्ड मिले हैं. निर्मल चंद्र डंडरियाल के खाते में कई राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार हैं. वह स्पोर्ट्स चैनल में वीडियो एडिटिंग करते हुए फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में आए थे और 2008 में उनकी पहली डॉक्यूमेंट्री ALL THE WORLD’S A STAGE ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री-शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल ‘इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल, केरल 2009’ में साउंड डिज़ाइन के लिए ज्यूरी स्पेशल मेंशन अवॉर्ड जीता था.

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