सौरव गांगुली बीसीसीआई के नए अध्‍यक्ष

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नई दिल्ली:  भारतीय क्रिकेट को एक नया नजरिया और आक्रामक सोच देने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के नए सफर की शुरुआत हो गई है. बीसीसीआई अध्यक्ष  पद के लिए सोमवार दोपहर तीन बजे के निर्धारित समय तक किसी ने भी नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके साथ ही सौरव गांगुली का अध्‍यक्ष पद पर बैठना औपचारिकता भर रह गया. हालांकि पहले बीसीसीआई अध्यक्ष पद की होड़ में पूर्व क्रिकेटर बृजेश पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन अचानक ही गांगुली ने उन्हें पीछे छोड़ दिया और बीसीसीआई के इस सबसे ताकतवर पद पर काबिज हो गए. हमेशा ही कुछ अलग करने के लिए मशहूर रहे सौरव गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष पद की शुरुआत भी एक नए रिकॉर्ड के साथ की है.

मौजूदा समय में बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली जुलाई 2020 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष बने रहेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि छह साल का उनका प्रशासनिक कार्यकाल जुलाई 2020 में पूरा हो रहा है. वह 2014 में बंगाल क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव बने थे. ऐसे में 47 वर्षीय गांगुली जुलाई 2020 में कैब पदाधिकारी के तौर पर छह साल पूरे कर लेंगे, जिसके बाद कूलिंग ऑफ पीरियड शुरू हो जाएगा. कूलिंग ऑफ पीरियड तीन साल का होता है. इस अवधि में आप किसी पद पर नहीं रह सकते. अब जबकि गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बन गए हैं तो फिर उन्हें कैब का अध्यक्ष पद छोड़ना होगा.

विज्जी का 65 साल पुराना रिकॉर्ड बराबर
सौरव गांगुली ने 65 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर बीसीसीआई के अध्यक्ष पद  की कुर्सी हासिल की है. दरअसल, गांगुली ऐसे दूसरे भारतीय कप्तान बन गए हैं, जो बीसीसीआई के पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाए गए हैं. इससे पहले साल 1954 में विजयनगरम के महाराजकुमार भारत के पहले ऐसे पूर्व कप्तान थे, जिन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष बनाया गया था. उन्हें विज्जी के नाम से भी जाना जाता था.

विज्जी ने साल 1936 में इंग्लैंड दौरे पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की अगुआई की थी. हालांकि सुनील गावस्कर को साल 2014 में बीसीसीआई का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वह पूर्णकालिक प्रशासक कभी नहीं रहे.

टीम इंडिया के पूर्व ओपनर सौरव गांगुली ने कहा, ‘निश्चित तौर पर यह बहुत अच्छा अहसास है क्योंकि मैं देश के लिए खेला हूं और कप्तान रहा हूं. मैं ऐसे समय में बीसीसीआई (BCCI) की कमान संभालने जा रहा हूं, जब पिछले तीन साल से बोर्ड की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है इसकी छवि बहुत खराब हुई है. मेरे लिए यह कुछ अच्छा करने का सुनहरा मौका है.

इस एजेंडे पर करेंगे काम
सौरव गांगुली का इरादा भारतीय क्रिकेट के सभी पक्षों से मिलने का और वे सारे काम करने का है जो पिछले 33 महीने में प्रशासकों की समिति नहीं कर सकी. उन्होंने कहा, ‘ पहले मैं सभी से बात करूंगा और फिर फैसला लूंगा. मेरी प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल करना होगा. मैं तीन साल से सीओए से भी यही कहता आया हूं लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी. सबसे पहले मैं प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की आर्थिक स्थिति दुरुस्त करूंगा.’

सहवाग, धोनी, युवराज को दिया मौका
सौरव गांगुली हमेशा से ही भारतीय क्रिकेट में नई सोच काे लाने के पक्षधर रहे हैं. उन्होंने टीम को आक्रामक रवैये और सोच के साथ खेलना सिखाया. गांगुली की अगुआई में भारतीय टीम ने 2003 के वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया था. गांगुली ने ही युवराज सिंह, जहीर खान, वीरेंद्र सहवाग और महेंद्र सिंह धोनी जैसे युवाओं में भरोसा जताया जो आगे चलकर क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े नामों में शुमार हुए. गांगुली साल 2015 से बंगाल क्रिकेट संघ के भी अध्यक्ष हैं.

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