Rajasthan Crisis: विधानसभा सत्र पर सस्पेंस और टकराव जारी

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जयपुर: राजस्‍थान का सियासी संकट हर रोज बदल रहा है. जबकि विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर सस्पेंस और टकराव का दौर जारी है. इस बीच, अशोक गहलोत सरकार ने राज्यपाल कलराज मिश्र को तीसरी बार विधानसभा सत्र बुलाने का संशोधित प्रस्ताव और जवाब भेजा है. आपको बता दें कि राज्‍यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्‍ताव खारिज करते हुए राज्‍य सरकार से तीन सवाल भी किए थे, लिहाजा कांग्रेस ने सवालों के जवाब के साथ 31 जुलाई को ही विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्‍ताव भी भेजा है.

विश्वासमत प्रस्ताव पर सरकार ने नहीं दिया कोई सीधा जवाब
बहरहाल, गहलोत सरकार ने विधानसभा सत्र को को लेकर अपना प्रस्‍ताव जरूर भेजा है, लेकिन उसने
विश्वासमत प्रस्ताव पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है. हालांकि उसने सदन में बैठक व्यवस्था को लेकर जरूर जवाब दिया है. आपको बता दें कि राज्यपाल कलराज मिश्र ने शोर्ट नोटिस पर सत्र बुलाने पर आपत्ति की थी और उन्‍होंने विधानसभा सत्र आहूत करने के लिए 21 दिन का नोटिस जरूरी बताया था. इस मामले पर राजस्‍थान के मंत्री हरीश चौधरी और प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि विधानसभा के कामकाज को तय करने का अधिकार स्पीकर और कार्य सलाहकार समिति (BAC) का है. इस मामले में राज्‍यपाल कुछ भी नहीं पूछ सकते हैं.

राज्यपाल के निर्देशों पर एक नजर
सोमवार को राज्यपाल कलराज मिश्र ने गहलोत सरकार को भेजे अपने पत्र में यह भी कहा था कि राजभवन की ऐसी कोई मंशा नहीं है कि विधानसभा सत्र न बुलाया जाए. राज्यपाल ने कहा है कि संवैधानिक नियमावली और तय प्रावधानों के तहत प्रदेश में सरकार चले, वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को विधानसभा का सत्र बुलाने का परामर्श दिया गया है.

1- विधानसभा सत्र 21 दिनों का नोटिस देकर बुलाया जाए, ताकि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों और सबको समान अवसर प्राप्त हो सके.
2- विश्वासमत प्राप्त करने की सभी प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की मौजूदगी में ही पूरी की जाए.
3- विश्वासमत प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाए.
4- विधानसभा में विश्वासमत प्राप्त करने की प्रक्रिया हां या ना के बटन दबाने के माध्यम से पूरी हो.
5- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विभिन्न मुकदमों में अपने फैसले दिए हैं, विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान इन फैसलों का भी ध्यान रखा जाए.
6- कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा देखते हुए विधानसभा में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन हो, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
7- विधानसभा सत्र के दौरान 1000 से अधिक कर्मचारी और 200 से ज्यादा सदस्यों की उपस्थिति से कोरोना संक्रमण का खतरा न फैले, इसका भी ध्यान रखा जाए.

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