राष्ट्रीय

भारत का बदला शुरू, अमेरिकी F-35 खरीदने से PM Modi ने मना कर दिया, अब आगे क्या?

भारत ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दे दिया है। एक ऐसा जवाब जो सिर्फ कूटनीतिक ही नहीं रणनीतिक भी है। एक ऐसा झटका जिससे वाशिंगटन की इंडो पैसेफिक रणनीति की जड़े हिल गई। अब भारत ने एफ 35 स्टील्थ फाइटर जेट की डील को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। ब्लूमबर्ग ने इसका दावा भी किया है। ये वही डील थी जो अमेरिका की तरफ से कई सालों से भारत को लुभाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। भारत ने साफ कर दिया कि हम अपनी सुरक्षा अमेरिका की मर्जी से तय नहीं करेंगे। ट्रंप सरकार की टैरिफ फाइट के बीच अब दिल्ली वाशिंगटन डिप्लोमेसी में नई टकराहट सामने आई है। 31 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए 25 प्रतिशत तक के टैरिफ की घोषणा कर दी। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से भारत हैरान रह गया। फिलहाल भारत तुरंत किसी जवाबी कार्यवाही के मूड में तो नहीं है। लेकिन अमेरिकी दवाब से निपटने के लिए भारतीय अथॉरिटी ने कुछ विकल्पों पर गौर करना शुरू कर दिया है। इसमें एनर्जी यानी ऊर्जा और कम्युनिकेशन  से जुड़े सेक्टर्स में इपोर्ट बढ़ाने का प्लान शामिल है। लेकिन डिफेंस की खरीद नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने जैसे ही 25 प्रतिशत की टैरिफ के साथ पैनल्टी लगाने का ऐलान किया तो नई दिल्ली के पॉलिसी मेकर्स को बड़ा झटका लगा था। लेकिन फिर भी आनन फानन में कोई भी कदम उठाने से अथॉरिटी ने खुद को रोके रखा। सरकार का साफ कहना है कि ट्रंप टैरिफ को लेकर तुरंत जवाबी शुल्क लगाने के बारे में नहीं सोचा जा रहा है। भारत सरकार ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन यानी डब्लयूटीओ में पहले से ही स्टील और ऑटोमोबाइल्स पर यूएस टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का अपना अधिकार रिजर्व रखा हुआ है। इस अधिकार को सही वक्त आने पर ही इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन अमेरिका भारत ट्रेड डील पर जारी बातचीत को ट्रैक पर बनाए रखने पर सरकार का फोकस है। लेकिन तमाम कवायदों से इतर ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी में व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान, नई दिल्ली ने उच्च-स्तरीय लड़ाकू विमानों की खरीद में अपनी रुचि नहीं दिखाई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने एफ-35 सौदे को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मज़बूत करने की आधारशिला के रूप में प्रचारित किया था। हालाँकि, रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत महंगे, तैयार विमानों की खरीद से दूर रह रहा है और इसके बजाय संयुक्त डिज़ाइन प्रयासों और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को प्राथमिकता दे रहा है।

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