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ये कैसी पाठशाला: भवन जर्जर, बरामदे में पढ़ाई… खतरे में बच्चों की जान

बरेली में दो स्कूल करीब सौ साल पुराने है। इनमें एक तो खंडहर में तब्दील हो चुका है। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को इन स्कूलों की पड़ताल की।

बरेली के सरकारी स्कूलों में कांवेंट स्तर की सुविधाएं मुहैया कराने के दावे साहूकारा प्राथमिक विद्यालय नवीन प्रथम के आगे खोखले साबित होते हैं। इस स्कूल का भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। बच्चे खतरे के साये में पढ़ाई करते हैं। हालात यह हैं कि तेज हवा चलने और बादल घिरने पर स्कूल में अवकाश कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

कैसी है पाठशाला… मुहिम के तहत परिषदीय विद्यालयों के हाल का जायजा लेने बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम दोपहर करीब एक बजे साहूकारा प्राथमिक विद्यालय पहुंची। खंडहर जैसे भवन में प्रधानाध्यापिका और सहायक अध्यापिका बच्चों का रिकॉर्ड आदि तैयार कर रहीं थीं। सभी कक्षाओं में ताला था।

पूछने पर बताया कि दोपहर करीब 12 बजे घने बादल मंडराने लगे तो बच्चों की छुट्टी कर दी गई, ताकि वे छत से टपकते बारिश के पानी और ईंट गिरने पर चोटिल होने से बच सकें। छुट्टी से पहले बच्चों को मिड डे मील खिला दिया था। बताया कि छत और दीवार की दरारों से पीपल आदि पौधे निकल रहे हैं। भवन के बीचोंबीच अमरूद का पेड़ सूख चुका है।

दोपहर 12:30 बजे टीम प्राथमिक विद्यालय नई कोतवाली पहुंची। नवनिर्मित भवन में सफाई थी, पर शौचालय गंदे मिले। एक ही कक्षा में पांचवीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है। पुराना भवन ध्वस्त कर दिया गया है। मलबे में उगी झाड़ियों में विषधर निकलने की आशंका रहती है। मच्छरों के लार्वा पनपने से बच्चों पर संचारी रोगों का खतरा मंडरा रहा है। स्कूल में 35 बच्चे पढ़ रहे थे। दो शिक्षक तैनात हैं, पर प्रभारी प्रधानाध्यापक आमिर ही बच्चों को पढ़ाते मिले।

प्रभारी प्रधानाध्यापक आमिर के मुताबिक स्कूल वर्ष 1927 से संचालित है। पुराना भवन गिरने लगा तो कायाकल्प के तहत नया भवन पिछले वर्ष बना। सफाईकर्मी नहीं है। नगर निगम के कर्मचारी शौचालय साफ नहीं करते। झाड़ियों की कटाई के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है, पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। माहभर पूर्व खुद के खर्चे पर झाड़ियां कटवाई थीं, पर बारिश में ये फिर से पनप गई हैं।

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