उत्तराखण्ड

सल्ट विधानसभा उपचुनाव के हालात 2017 से अलग नहीं

पिथौरागढ़: सूबे की सल्ट विधानसभा भले ही पहली बार उपचुनाव का सामना कर रही हो, लेकिन यहां के चुनावी हालात बहुत हद तक 2017 के जैसे ही हैं. इस दौरान अंतर आया है तो सिर्फ इतना कि सुरेन्द्र जीना की जगह उनके भाई महेश जीना बीजेपी से मैदान में हैं. सल्ट विधानसभा में चुनावी रण पूरी तरह बिछ गया है. विधायक सुरेन्द्र जीना के निधन के बाद बीजेपी ने उनके भाई महेश जीना पर भरोसा जताया है तो कांग्रेस ने 2017 की रनर-अप रही गंगा पंचोली पर फिर दांव खेला है. मुख्य मुकाबला इस बार भी 2017 की तर्ज बीजेपी और कांग्रेस की बीच ही है. बस अंतर इतना है कि बीजेपी के सुरेन्द्र की जगह महेश जीना ने ले ली है. यही नहीं मतदाताओं की संख्या में बीते चार सालों में बहुत अंतर नहीं आया है. बीते चुनाव में जहां सल्ट में 95 हजार 158 वोटर थे, वहीं अब इनकी संख्या 95 हजार 241 हो गई है. कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा का कहना है कि भले ही ज्यादातर हालात 2017 के जैसे ही हों, लेकिन इस बार चुनाव परिणाम 2017 से उलट रहेंगे. टम्टा दावा करते हैं कि कांग्रेस की जीत निश्चित है.

20017 के रण में भले ही जीत बीजेपी के सुरेन्द्र जीना की हुई थी, लेकिन अंतिम क्षणों में पहली बार विधानसभा के रण में उतरी गंगा पंचोली ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी. बीजेपी के जीना को इस चुनाव में जहां 21581 वोट मिले थे तो कांग्रेस की गंगा को 18677 वोट मिले थे. उम्मीदवारों के लिहाज से 2017 में 10 दावेदार मैदान थे तो इस बार इनकी संख्या घटकर 7 जरूर हो गई है. बीते चुनाव से तुलना की जाए तो यहां कांग्रेस और बीजेपी के अलावा किसी का भी जनाधार नजर नहीं आता. 2017 में भुवन जोशी तीसरे नम्बर पर रहे, लेकिन उन्हें वोट सिर्फ 669 मिले थे.

बीजेपी सांसद अजय भट्ट का कहना है कि उनकी पार्टी सल्ट उपचुनाव तो भारी मतों से जीत ही रही है, साथ ही यहां से 2022 के विधानसभा चुनावों की जीतने का रास्ता तैयार होगा. भले ही उपचुनाव में सल्ट विधानसभा के चुनावी समीकरण बहुत ज्यादा न बदले हों, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या नतीजा भी पिछली बार की तरह ही रहता है या फिर जनता जनार्दन नया इतिहास रचती है. ऐसे में अब सबकी निगाहें 2 मई पर टिकी हैं, जब ईवीएम का पिटारा खुलेगा.

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