उत्तराखण्ड में उठा भू-कानून का मुद्दा, बनेगा चुनावी मुद्दा

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अल्मोड़ा: राज्य में भू-कानून को लेकर प्रदेश भर में एक हवा चल पड़ी है. एक तरफ सोशल मीडिया पर लोग हिमाचल प्रदेश की तर्ज़ पर पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में भी भू-कानून चाह रहे हैं, जिससे प्रदेश की ज़मीनें भू-माफियाओं से बचाई जा सकें. दूसरी तरफ, 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इसे चुनावी मुद्दा बनाने जा रही हैं. कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि राज्य में भू-कानून बनाने की मांग तेज़ी से हो रही है. आगामी कैबिनेट में यह मुद्दा रखा जाएगा और युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस तरफ सटीक कदम उठाए जाएंगे.

वहीं, जागेश्वर से कांग्रेस के विधायक व पूर्व स्पीकर गोविन्द सिंह कुंजवाल का कहना है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में रखेगी. कुंजवाल के ​मुताबिक राज्य बनने के साथ ही राज्य में भू-कानून लागू होना चाहिए था, जिससे राज्य की जमीन को बचाया जा सकता था लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अब कांग्रेस सत्ता में आते ही भू-कानून को लागू करेगी. भाजपा के अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा तो राज्य में सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में भू-कानून लागू करने से लाभ होगा और लोग भूमिहीन नहीं होंगे. गौरतलब है कि राज्य बनने के बाद ही अगर भू-कानून बनाने की कवायद हुई होती तो आज कई स्थानीय लोग भूमिहीन न होते और राज्य में भू-माफिया का मकड़जाल इतना न बढ़ा होता. सोशल मीडिया पर इन दिनों यह मुद्दा काफी गर्म है. आंदोलित युवाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि नहीं समय पर नहीं चेते तो राज्य और पर्यटन स्थलों में राज्य के नहीं, अन्य प्रदेशों के लोगों का राज होगा. राज्य के युवाओं को रोज़गार देने सहित कई मांगों को लेकर उत्तराखंड के युवा लगातार मुद्दे उठा रहे हैं.

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