सीएम धामी बोले-पीएम मोदी की अपील का दिखा असर, तीर्थयात्री खरीद रहे हैं भोजपत्र के उत्पाद

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के प्रथम गांव माणा में की गई अपील का ही परिणाम है कि आज यहां आने वाले तीर्थयात्री भोजपत्र के उत्पादों सहित अन्य स्थानीय उत्पादों को अच्छे दामों पर खरीद रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जनपद चमोली की नीती-माणा घाटी की महिलाओं के लिखे गए पत्र का जिक्र किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम स्वनिधि लाभार्थियों के साथ ‘मन की बात’ को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री धामी ने एक ट्वीट कर कहा कि भोजपत्र देवभूमि उत्तराखण्ड की प्राचीन विरासत का हिस्सा है। हमारी सरकार प्रदेश की समस्त सांस्कृतिक विरासतों को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड से प्रधानमंत्री मोदी का विशेष लगाव है,आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड के नीती-माणा घाटी की महिलाओं के लिखे गए भोजपत्र का जिक्र करना प्रदेश के लोगों के लिए खुशी की बात है। प्रधानमंत्री जब चमोली आए थे तो लोकल फॉर वोकल का भी जिक्र किया था। इसके बाद चमोली के नीती-माणा घाटी की महिलाओं ने भोजपत्र में एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया था।

‘मन की बात’ सुनने से मिलती है प्रेरणा : गणेश जोशी

कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 103 वां संस्करण को सुना। इसके बाद मंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम लोगों को नए कार्य करने एवं समाज के लिए अनेक कार्य करने की प्रेरणा देता है। अनेक प्रकार की विभिन्न जानकारी मिलती है।

मंत्री जोशी ने कहा फुटबॉल को लेकर भी ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिक्र किया है। वह शीघ्र ही देहरादून में फुटबॉल मैच का एक आयोजन किया जाएगा और फुटबॉल के प्रति बच्चों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित प्रदेश के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कार्य किया जा रहा है। उत्तराखंड में सैनिकों के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के स्वरूप भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए उत्तराखंड में 1734 शहीदों के आंगन की पवित्र मिट्टी और प्रदेश की प्रमुख 28 पवित्र नदियों का जल लेकर कलश यात्रा के माध्यम से सैन्य धाम में प्रतिस्थापित किया गया है।

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